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बसपा छत्तीसगढ़ ने प्रदेश की साय सरकार की बजट 2026-27 को बताया मृगमरीचिका

बहुजन समाज पार्टी छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी मान. हेमन्त पोयाम जी ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा पेश किए गए 2026-2027 बजट को बताया सपने दिखाने वाला

छत्तीसगढ सरकार द्वारा प्रस्तुत 2026-27 का बजट: एक विश्लेषण
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छत्तीसगढ की भाजपा सरकार के वित्त मंत्री श्री ओ.पी.चौधरी द्वारा प्रस्तुत 2026-27 का बजट एक मृगमरीचिका के समान है। जिसमें इंसान को सड़क में पानी होने का दृष्टिभ्रम होता है लेकिन सामने होता कुछ नहीं है।
देखने के लिए तो यह बजट 01 लाख 72 हजार करोड़ का है, जिससे जनता को यह झूठा अहसास होता है कि इतने पैसों से राज्य की जनता की गरीबी, बेरोजगारी और शिक्षा की समस्या आदि का अंत होगा और यहां की जनता खुशहाली की जिंदगी जीवन-यापन करेगी। परंतु ऐसा कुछ भी होता नहीं है। ये पिछले 26 वर्षों में छत्तीसगढ राज्य निर्माण के बाद की बनी कांग्रेस-भाजपा की सरकारों के द्वारा पेश किये गये बजट को देखकर समझ सकते हैं।
ये सरकार कभी बजट की थीम को “ज्ञान” का नाम देती है। कभी “गति” का नाम देती हे। इस वर्ष के बजट को “संकल्प” का नाम देकर जनता को फिर से एक झुनझुना पकड़ाने का काम किया है।
किसानों को ब्याजमुक्त कर्ज भी एक छलावा है। सभी को मालूम है कि छत्तीसगढ के किसानों के हालात कैसे हैं। खाद-बीज-दवा की कीमत को कम करने के बजाय सरकार ने किसानों को कोचियों और व्यापारियों के ऊपर निर्भर होने के लिए बाध्य कर दिया है। वन संरक्षण के लिए 930 करोड़ का प्रावधान किया है। समझ नहीं आता कि प्राकृतिक रूप से हमें उपहार के रूप में मिले वन-संसाधनों को अपने पूंजीपति मित्र अडाणी को सौंपने वाली सरकार इन पैसों से कौन सा वन संरक्षण करेगी। रायपुर में 200 बिस्तरों वाला अस्पताल बनाने की घोषणा तो किया है, लेकिन पहले से मौजूद मेकाहारा, डी.के.एस, और एम्स जैसी मेडिकल संस्थाओं में पूरे छत्तीसगढ के कोने-कोने से आए गरीब मरीज बुनियादी सुविधाओं के लिए एक वार्ड से दूसरे वार्ड भटकते रहते हैं। उनकी कोई पूछ परख करने वाला कोई नहीं है। बाकि रायपुर में कुकुरमुत्तों की तरह उग आये निजी अस्पतालों में सरकारी पैसों की लूट अनवरत जारी है। अबूझमाड़ और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी वसाने की घोषणा का कोई औचित्य नहीं है। जब वहां पर जिनको पढ़ना है उन आदिवासियों को ही देश की सेना लगाकर मार-मार के खत्म किया जा रहा हो वहां पर उनको शिक्षित करने की दया दिखाने की नौटंकी किसी को थप्पड़ मारकर गाल सहलाने जैसा है। महतारी वंदन योजना के लिए 8200 करोड़ का प्रावधान किया गया है, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट कहता है कि चुनावी वर्ष में महिलाओं के खाते में पैसा ट्रांसफर करने के बाद उनके खाते में कोई पैसा नहीं भेजा गया है। रानी दुर्गावती योजना में 18 वर्ष की बालिका को 1.5 लाख देने की घोषणा किया गया है। ये और कुछ नहीं उत्तर प्रदेश में बहन कु. मायावती जी की बसपा सरकार द्वारा शुरु की गई सावित्रीबाई फूले बालिका शिक्षा मदद योजना की नकल है। लोक निर्माण विभाग को 9450 करोड़ का आबंटन मिला है, लेकिन जनता जानती हे कि विभाग द्वारा बनाये गये रोड और पुल-पुलियों की क्या स्थिति है। उद्योग विभाग का बजट 1750 करोड़ है लेकिन सबसे ज्यादा इस प्रदेश में गरीब आदिवासी, अनुसूचित जाति और पिछड़ों का शोषण हुआ है तो औद्योगिकीकरण के नाम से हुआ है। बस्तर में भी सरकारी उपक्रम लगाने के नाम से किसानों की दसों हजार हेक्टेयर जमीन को अधिग्रहण किया जाता है, लेकिन उद्योग लगने के बाद उसे किसी सेठ के पास बेच दिया जाता है।
इसलिए इस बजट को देखकर यही लगता है कि ये अपने चहेते ठेकेदारों-पूंजीपतियों और धन्ना सेठों को खुश करने के लिए डिजाइन किया गया है।
इससे छत्तीसगढ के गरीब, किसान-मजदूर, मजदूर आदिवासी, अनुसूचित जाति और पिछड़े अल्पसंख्यक व सर्व समाज के गरीबों, बेरोजगारों, छोटे व्यापारियों और लघु व सीमांत किसानों, महिलाओं और अन्य दु:खी व लाचार लोगों को कोई फायदा नहीं होने वाला है।
ऐसा बहुजन समाज पार्टी छत्तीसगढ का मानना है।


-हेमन्त पोयाम
प्रदेश प्रभारी
बहुजन समाज पार्टी
छत्तीसगढ राज्य

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